100 Shabdon Ki Kahaniyan
Mubashshir Ali Zaidi₹300
Seller: Rekhta Publication
| Item Weight: | 210 Grams |
|---|---|
| ISBN: | 9789394494350 |
| Author: | Ali Akbar Natiq |
| Language: | Hindi |
| Publisher: | Rekhta Publication |
| Pages: | 584 |
| Dimensions: | 18 x 18 x 1.5 cm |
| Book type: | Paperback |
| Publishing year: | 2024 |
| Genre: | Novels |
| Return Policy: | 14 days, replacement only |
प्रस्तुत उपन्यास "नौलखी कोठी" हिन्दुस्तान में अग्रेज़ी सरकार के शासन और उसके बाद के दौर में बदलते सामाजिक हालात की कहानी है। इंग्लैंड में आठ लम्बे साल गुज़ारने के बाद विलियम विभाजन-पूर्व पंजाब में जलालाबाद के नवनियुक्त सहायक आयुक्त के रूप में हिंदुस्तान लौट आता है। वो अपने दादा द्वारा बनवाए गए आलीशान बंगले नौलखी कोठी में अपने 'घर' में लौटने का सपना देखता है, लेकिन घटनाओं का एक अपरिवर्तनीय मोड़ उसका इंतजार कर रहा है, जो न केवल उसकी क़िस्मत बदल देता है, बल्कि ज़मीन की क़िस्मत भी हमेशा के लिए बदल देता है। अली अकबर नातिक़ का ये उपन्यास, "नौलखी कोठी", उस समय की युगचेतना का एक व्यावहारिक चित्रण है। ये कहानी विभाजन से पहले के वर्षों में शुरू होती है और अस्सी के दशक तक चलती है।
प्रस्तुत उपन्यास "नौलखी कोठी" हिन्दुस्तान में अग्रेज़ी सरकार के शासन और उसके बाद के दौर में बदलते सामाजिक हालात की कहानी है। इंग्लैंड में आठ लम्बे साल गुज़ारने के बाद विलियम विभाजन-पूर्व पंजाब में जलालाबाद के नवनियुक्त सहायक आयुक्त के रूप में हिंदुस्तान लौट आता है। वो अपने दादा द्वारा बनवाए गए आलीशान बंगले नौलखी कोठी में अपने 'घर' में लौटने का सपना देखता है, लेकिन घटनाओं का एक अपरिवर्तनीय मोड़ उसका इंतजार कर रहा है, जो न केवल उसकी क़िस्मत बदल देता है, बल्कि ज़मीन की क़िस्मत भी हमेशा के लिए बदल देता है। अली अकबर नातिक़ का ये उपन्यास, "नौलखी कोठी", उस समय की युगचेतना का एक व्यावहारिक चित्रण है। ये कहानी विभाजन से पहले के वर्षों में शुरू होती है और अस्सी के दशक तक चलती है।