100 Shabdon Ki Kahaniyan
Mubashshir Ali Zaidi₹199₹24920% off
Front cover · 1 of 2
by Azm Shakri
No reviews yetSeller: Rekhta Publication
| Item Weight: | 400 Grams |
|---|---|
| ISBN: | 9788198302601 |
| Author: | Azm Shakri |
| Language: | Hindi |
| Publisher: | Rekhta Publication |
| Pages: | 222 |
| Dimensions: | 20.32 x 12.7 x 5.08 cm |
| Book type: | Paperback |
| Publishing year: | 2025 |
| Genre: | Poetry |
अज़्म शाकिरी की ये किताब अपनी जज़्बाती गहराई और असरदार अन्दाज़ की वजह से दिलों को छूती है। उनके अशआर ज़िन्दगी, मोहब्बत और वुजूद के गहरे मायनों को बड़ी खूबसूरती से बयान करते हैं। उनकी ये किताब इस बात की मिसाल है कि वो पारम्परिक ग़ज़ल के ढाँचे को मौजूदा दौर के एहसासात से जोड़ने में माहिर हैं। अज़्म शाकिरी (मोहम्मद मियाँ ) 23 फ़रवरी 1972 को गंजडुंडवारा, ज़िला कासगंज, उत्तर प्रदेश में पैदा हुए और वहीं शिक्षा प्राप्त की। बाद में मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय से उर्दू में एम. ए. किया। 1987 में शायरी शुरू की। 2003 में पहली किताब “बर्फ़” के नाम से आई। दूसरी किताब 2008 में “सुर्ख़ाब” के नाम से आई। तीसरी किताब 2014 में “मेहराब−ए−इश्क़” और चौथी किताब 2019 में “क्या पत्थर के हो गए हम” के नाम से आई। अज़्म शाकिरी मुशायरों और कवि सम्मेलनों में काफ़ी प्रसिद्ध हुए। ग़ज़ल उनकी ख़ास पहचान बनी। भारत से बाहर भी दूसरे बहुत से देशों में गए और ये सिलसिला आज भी जारी है।
अज़्म शाकिरी की ये किताब अपनी जज़्बाती गहराई और असरदार अन्दाज़ की वजह से दिलों को छूती है। उनके अशआर ज़िन्दगी, मोहब्बत और वुजूद के गहरे मायनों को बड़ी खूबसूरती से बयान करते हैं। उनकी ये किताब इस बात की मिसाल है कि वो पारम्परिक ग़ज़ल के ढाँचे को मौजूदा दौर के एहसासात से जोड़ने में माहिर हैं। अज़्म शाकिरी (मोहम्मद मियाँ ) 23 फ़रवरी 1972 को गंजडुंडवारा, ज़िला कासगंज, उत्तर प्रदेश में पैदा हुए और वहीं शिक्षा प्राप्त की। बाद में मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय से उर्दू में एम. ए. किया। 1987 में शायरी शुरू की। 2003 में पहली किताब “बर्फ़” के नाम से आई। दूसरी किताब 2008 में “सुर्ख़ाब” के नाम से आई। तीसरी किताब 2014 में “मेहराब−ए−इश्क़” और चौथी किताब 2019 में “क्या पत्थर के हो गए हम” के नाम से आई। अज़्म शाकिरी मुशायरों और कवि सम्मेलनों में काफ़ी प्रसिद्ध हुए। ग़ज़ल उनकी ख़ास पहचान बनी। भारत से बाहर भी दूसरे बहुत से देशों में गए और ये सिलसिला आज भी जारी है।