Skip to content
Lighthouse Book Store

Front cover · 1 of 2

Kuch Ishq Tha Kuch Majboori Thi

by Obaidullah Aleem

No reviews yet
₹196Save 21%
₹249Inclusive of all taxes
Quantity
1

Seller: Rekhta Publication

  • Free delivery over ₹999
  • 5 Days Return Policy
  • Secure UPI, card & netbanking

Tags:PoetryHindiPaperbackRekhta Publication

Share:WhatsAppXFacebook
Book details
Item Weight:300 Grams
ISBN:9788198302687
Author:Obaidullah Aleem
Language:Hindi
Publisher:Rekhta Publication
Pages:149
Dimensions:21 x 14 x 1 cm
Book type:Paperback
Publishing year:2025
Genre:Poetry

उबैदुल्लाह अलीम की शायरी आम ज़िन्दगी के जाने-पहचाने लम्हों और रोज़मर्रा के तज्रबों को इस तरह बयान करती है कि वो एक गहरे और असरदार एहसास में बदल जाते हैं। उनकी शायरी दिल और ज़ेहन—दोनों पर असर डालती है। अलीम ने उस दौर की चलन में आई हुई शायरी की परम्परा या स्टाइल को नहीं अपनाया, बल्कि उन्होंने एक अलग और नई रूमानी संवेदना के साथ अपने अशआर में ताज़गी भरी है। उनकी शायरी में सिर्फ़ मोहब्बत या दर्द ही नहीं, बल्कि ज़िन्दगी के अलग-अलग पहलुओं की झलक भी मिलती है। अलीम के अशआर पढ़ते हुए महसूस होता है कि वो शायरी को सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का खेल नहीं मानते, बल्कि एक गहरी और संवेदनशील तज्रबे की तरह पेश करते हैं। उबैदुल्लाह अलीम अविभाजित हिन्दुस्तान की भोपाल रियासत में 11 जनवरी 1939 को पैदा हुए। शुरूआती तालीम भोपाल ही में हासिल की। उनके वालिद सियालकोटी, कश्मीरी थे और वालिदा का तअल्लुक़ भोपाल से ही था। उन्होंने 1967 में कराची यूनीवर्सिटी से उर्दू अदब में एम.ए. किया। फिर वो पाकिस्तान टेलीविज़न में बहैसियत प्रोड्यूसर मुलाज़िम हो गए। अलीम ग़ज़ल में मीर तक़ी ‘मीर’ की परम्परा का अनुसरण करते थे लेकिन समसामयिकता और आधुनिकता के भी क़ायल थे। उबैदुल्लाह अलीम का पहला मज्मूआ-ए-कलाम ‘चाँद चेहरा सितारा आँखें’ 1974 में प्रकाशित हुआ जिसे असाधारण रूप से सराहना मिली और उनके कलाम की शोहरत दुनिया भर में होने लगी। दूसरा मज्मूआ-ए-कलाम ‘वीरान सराय का दिया’ 1986 में सामने आया। अलीम की ग़ज़लों के साथ-साथ उनकी नज़्में भी बहुत मक़बूल हुईं। ये बेमिसाल शायर 18 मई 1998 को इस दुनिया से कूच कर गया।

Customer Reviews

Reader reviews

No reviews yet — be the first voice on this one.

Sign in to write a review.

Keep browsing

More from Poetry