Main ek karsevak tha
Seller: Navarun Prakashan
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| Item Weight: | 200 Grams |
|---|---|
| ISBN: | 978-8194118510 |
| Author: | Bhanwar Meghwanshi |
| Language: | Hindi |
| Publisher: | Navarun Prakashan |
| Pages: | 120 |
| Book type: | Paperback |
| Publishing year: | 2019 |
| Genre: | Biography & Memoirs |
‘मैं एक कारसेवक था’ भंवर मेघवंशी की आत्मकथा है, जिसमें वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से अपने जुड़ाव, राम जन्मभूमि आंदोलन में भागीदारी और संगठन के भीतर जातिगत भेदभाव के अपने अनुभवों को दर्ज करते हैं। किशोरावस्था में RSS से जुड़ने वाले भंवर मेघवंशी एक समय उसकी विचारधारा से गहरे प्रभावित थे। लेकिन संगठन के भीतर मिले अनुभवों ने उन्हें हिंदू एकता, जाति व्यवस्था और सामाजिक समानता के सवालों पर नए सिरे से सोचने के लिए विवश किया। इस पुस्तक में वे अपने जीवन के उन प्रसंगों को सामने रखते हैं, जिन्होंने उनकी राजनीतिक और वैचारिक समझ को बदलने में अहम भूमिका निभाई। यह आत्मकथा भारतीय समाज में जाति और धर्म के अंतर्संबंधों, दलित अस्मिता, राजनीतिक विचारधाराओं और सामाजिक न्याय के सवालों पर विचार करने का अवसर देती है। लेखक अपने निजी अनुभवों के माध्यम से यह पड़ताल करते हैं कि समानता और एकता के दावों के बीच जातिगत भेदभाव किस तरह मौजूद रह सकता है। भारतीय राजनीति, दलित साहित्य, सामाजिक इतिहास और समकालीन वैचारिक विमर्श में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए ‘मैं एक कारसेवक था’ एक विचारोत्तेजक पुस्तक है।
‘मैं एक कारसेवक था’ भंवर मेघवंशी की आत्मकथा है, जिसमें वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से अपने जुड़ाव, राम जन्मभूमि आंदोलन में भागीदारी और संगठन के भीतर जातिगत भेदभाव के अपने अनुभवों को दर्ज करते हैं।
‘मैं एक कारसेवक था’ भंवर मेघवंशी की आत्मकथा है, जिसमें वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से अपने जुड़ाव, राम जन्मभूमि आंदोलन में भागीदारी और संगठन के भीतर जातिगत भेदभाव के अपने अनुभवों को दर्ज करते हैं। किशोरावस्था में RSS से जुड़ने वाले भंवर मेघवंशी एक समय उसकी विचारधारा से गहरे प्रभावित थे। लेकिन संगठन के भीतर मिले अनुभवों ने उन्हें हिंदू एकता, जाति व्यवस्था और सामाजिक समानता के सवालों पर नए सिरे से सोचने के लिए विवश किया। इस पुस्तक में वे अपने जीवन के उन प्रसंगों को सामने रखते हैं, जिन्होंने उनकी राजनीतिक और वैचारिक समझ को बदलने में अहम भूमिका निभाई। यह आत्मकथा भारतीय समाज में जाति और धर्म के अंतर्संबंधों, दलित अस्मिता, राजनीतिक विचारधाराओं और सामाजिक न्याय के सवालों पर विचार करने का अवसर देती है। लेखक अपने निजी अनुभवों के माध्यम से यह पड़ताल करते हैं कि समानता और एकता के दावों के बीच जातिगत भेदभाव किस तरह मौजूद रह सकता है। भारतीय राजनीति, दलित साहित्य, सामाजिक इतिहास और समकालीन वैचारिक विमर्श में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए ‘मैं एक कारसेवक था’ एक विचारोत्तेजक पुस्तक है।
‘मैं एक कारसेवक था’ भंवर मेघवंशी की आत्मकथा है, जिसमें वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से अपने जुड़ाव, राम जन्मभूमि आंदोलन में भागीदारी और संगठन के भीतर जातिगत भेदभाव के अपने अनुभवों को दर्ज करते हैं।
