Aawara Bagule
Fatima Hasan₹239₹29920% off
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Seller: AAS Publisher
| Item Weight: | 300 Grams |
|---|---|
| ISBN: | 9788199281943 |
| Author: | Vivek Mishra |
| Language: | Hindi |
| Publisher: | AAS Publisher |
| Pages: | 240 |
| Dimensions: | 8.5 cmX2.5 cm |
| Book type: | Paperback |
| Publishing year: | 2026 |
| Genre: | Fiction |
‘डॉमनिक की वापसी’ विवेक मिश्र का एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक उपन्यास है, जो समकालीन भारतीय समाज की जटिलताओं, जातिगत असमानताओं, सामाजिक रूढ़ियों और व्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रश्नों को अपनी कथा के केंद्र में रखता है। उपन्यास की कथा एक रंगकर्मी दीपांश के रहस्यमय ढंग से लापता होने और फिर एक वर्ष बाद घायल अवस्था में मिलने की घटना से आरम्भ होती है। रंगमंच पर ‘डॉमनिक’ के नाम से पहचाने जाने वाले दीपांश की जीवन-यात्रा के माध्यम से लेखक समाज के उन अंतर्विरोधों को उजागर करते हैं, जिनमें प्रेम, जाति, धर्म, सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत स्वायत्तता के बीच निरंतर संघर्ष दिखाई देता है। यह उपन्यास केवल एक व्यक्ति की कथा नहीं, बल्कि उस सामाजिक परिवेश का भी आख्यान है जहाँ प्रेम और अपनी इच्छा से जीवन जीने का निर्णय कई बार हिंसा तथा सामाजिक बहिष्कार का कारण बन जाता है। रंगमंच, लोककला और प्रतिरोध की सांस्कृतिक परम्पराओं को कथा में शामिल करते हुए विवेक मिश्र ने सामाजिक यथार्थ के विविध पक्षों को रेखांकित किया है। ‘डॉमनिक की वापसी’ अपने समय के सामाजिक प्रश्नों से मुठभेड़ करता हुआ एक ऐसा उपन्यास है, जो मनुष्य की स्वतंत्रता, प्रेम और गरिमा के सवालों पर गंभीर विचार के लिए प्रेरित करता है।
‘डॉमनिक की वापसी’ विवेक मिश्र का एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक उपन्यास है, जो समकालीन भारतीय समाज की जटिलताओं, जातिगत असमानताओं, सामाजिक रूढ़ियों और व्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रश्नों को अपनी कथा के केंद्र में रखता है। उपन्यास की कथा एक रंगकर्मी दीपांश के रहस्यमय ढंग से लापता होने और फिर एक वर्ष बाद घायल अवस्था में मिलने की घटना से आरम्भ होती है। रंगमंच पर ‘डॉमनिक’ के नाम से पहचाने जाने वाले दीपांश की जीवन-यात्रा के माध्यम से लेखक समाज के उन अंतर्विरोधों को उजागर करते हैं, जिनमें प्रेम, जाति, धर्म, सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत स्वायत्तता के बीच निरंतर संघर्ष दिखाई देता है। यह उपन्यास केवल एक व्यक्ति की कथा नहीं, बल्कि उस सामाजिक परिवेश का भी आख्यान है जहाँ प्रेम और अपनी इच्छा से जीवन जीने का निर्णय कई बार हिंसा तथा सामाजिक बहिष्कार का कारण बन जाता है। रंगमंच, लोककला और प्रतिरोध की सांस्कृतिक परम्पराओं को कथा में शामिल करते हुए विवेक मिश्र ने सामाजिक यथार्थ के विविध पक्षों को रेखांकित किया है। ‘डॉमनिक की वापसी’ अपने समय के सामाजिक प्रश्नों से मुठभेड़ करता हुआ एक ऐसा उपन्यास है, जो मनुष्य की स्वतंत्रता, प्रेम और गरिमा के सवालों पर गंभीर विचार के लिए प्रेरित करता है।