Aawara Bagule
Fatima Hasan₹239₹29920% off
Seller: Arshia Publication
| ISBN: | 93-669138-5-7 |
|---|---|
| Author: | Mohd. Farooque Khan |
| Language: | Hindi |
| Publisher: | Arshia Publication |
| Pages: | 300 |
| Book type: | Hardcover |
| Publishing year: | 2026 |
| Genre: | Literary Fiction |
दारा शिकोह: जीवन और नज़रिया डॉ. मुहम्मद फ़ारूक़ ख़ान की एक महत्वपूर्ण शोधपरक कृति है, जिसमें मुग़ल राजकुमार दारा शिकोह के जीवन, विचारों और वैचारिक दृष्टिकोण का गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इस पुस्तक में दारा शिकोह को केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपरा के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में देखा गया है। लेखक ने दारा शिकोह की जीवन-यात्रा, उनकी आध्यात्मिक रुचियों, सूफ़ी विचारधारा से उनके संबंध तथा हिंदू और इस्लामिक चिंतन के बीच संवाद स्थापित करने के उनके प्रयासों का विस्तार से विश्लेषण किया है। साथ ही उस ऐतिहासिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि को भी स्पष्ट किया गया है, जिसमें उनका जीवन और उनका अंत आकार लेता है। यह पुस्तक दारा शिकोह के विचारों को समझने के साथ-साथ मुग़ल कालीन इतिहास, भारतीय दर्शन और धार्मिक सह-अस्तित्व के प्रश्नों पर भी एक गंभीर दृष्टि प्रदान करती है। डॉ. मुहम्मद फ़ारूक़ ख़ान का लेखन शोधपरक, संतुलित और तथ्य-आधारित है, जो पाठक को विषय की गहराई तक पहुँचाता है। इतिहास, सूफ़ी परंपरा, मुग़ल काल और वैचारिक अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठकों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पठनीय कृति है।"
दारा शिकोह: जीवन और नज़रिया डॉ. मुहम्मद फ़ारूक़ ख़ान की एक महत्वपूर्ण शोधपरक कृति है, जिसमें मुग़ल राजकुमार दारा शिकोह के जीवन, विचारों और वैचारिक दृष्टिकोण का गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इस पुस्तक में दारा शिकोह को केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपरा के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में देखा गया है। लेखक ने दारा शिकोह की जीवन-यात्रा, उनकी आध्यात्मिक रुचियों, सूफ़ी विचारधारा से उनके संबंध तथा हिंदू और इस्लामिक चिंतन के बीच संवाद स्थापित करने के उनके प्रयासों का विस्तार से विश्लेषण किया है। साथ ही उस ऐतिहासिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि को भी स्पष्ट किया गया है, जिसमें उनका जीवन और उनका अंत आकार लेता है। यह पुस्तक दारा शिकोह के विचारों को समझने के साथ-साथ मुग़ल कालीन इतिहास, भारतीय दर्शन और धार्मिक सह-अस्तित्व के प्रश्नों पर भी एक गंभीर दृष्टि प्रदान करती है। डॉ. मुहम्मद फ़ारूक़ ख़ान का लेखन शोधपरक, संतुलित और तथ्य-आधारित है, जो पाठक को विषय की गहराई तक पहुँचाता है। इतिहास, सूफ़ी परंपरा, मुग़ल काल और वैचारिक अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठकों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पठनीय कृति है।"