Aawara Bagule
Fatima Hasan₹299
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Seller: Lighthouse Publication
| ISBN: | 8199256508 |
|---|---|
| Author: | Dr. Ishtiaq Ahmed |
| Language: | Hindi |
| Publisher: | Lighthouse Publication |
| Pages: | 256 |
| Book type: | Paperback |
| Publishing year: | 2026 |
| Genre: | Cinema |
| Return Policy: | 14 days, replacement only |
डॉ. इश्तियाक़ अहमद की यह पुस्तक “बंटवारे से पहले के पंजाब का हिंदुस्तानी सिनेमा में योगदान” हमारे साझा अतीत के उन समृद्ध और प्रेरक पक्षों को सामने लाती है, जिन्हें अक्सर सरसरी निगाह से देखा गया है। मूल रूप से अंग्रेज़ी में प्रकाशित इस कृति का हिंदी अनुवाद अमनदीप कौर सेखों ने अत्यंत सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण भाषा में किया है। यह केवल अनुवाद नहीं, बल्कि एक अधिक प्रमाणिक संस्करण है,जिसमें मूल अंग्रेज़ी पाठ की कुछ त्रुटियों का परिमार्जन किया गया है और नवीन निश्चल, दारा सिंह, निशी कोहली जैसे महत्वपूर्ण पंजाबी कलाकारों के नाम व योगदान भी जोड़े गए हैं, जो पहले अनुपस्थित थे। पुस्तक में मोहम्मद रफ़ी, प्राण, के. एल. सहगल, सुनील दत्त, राज कपूर, देव आनंद, साहिर लुधियानवी जैसे दिग्गजों के जीवन और योगदान को संवेदनशील व रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, यह उन अनेक कम-ज्ञात नामों और उनके महत्त्वपूर्ण योगदानों पर भी प्रकाश डालती है, जो इस सांस्कृतिक परिदृश्य को पूर्णता देते हैं। सिनेमा, इतिहास और साहित्य में समान रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक एक अनमोल ख़ज़ाना है।
डॉ. इश्तियाक़ अहमद की यह पुस्तक “बंटवारे से पहले के पंजाब का हिंदुस्तानी सिनेमा में योगदान” हमारे साझा अतीत के उन समृद्ध और प्रेरक पक्षों को सामने लाती है, जिन्हें अक्सर सरसरी निगाह से देखा गया है। मूल रूप से अंग्रेज़ी में प्रकाशित इस कृति का हिंदी अनुवाद अमनदीप कौर सेखों ने अत्यंत सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण भाषा में किया है। यह केवल अनुवाद नहीं, बल्कि एक अधिक प्रमाणिक संस्करण है,जिसमें मूल अंग्रेज़ी पाठ की कुछ त्रुटियों का परिमार्जन किया गया है और नवीन निश्चल, दारा सिंह, निशी कोहली जैसे महत्वपूर्ण पंजाबी कलाकारों के नाम व योगदान भी जोड़े गए हैं, जो पहले अनुपस्थित थे। पुस्तक में मोहम्मद रफ़ी, प्राण, के. एल. सहगल, सुनील दत्त, राज कपूर, देव आनंद, साहिर लुधियानवी जैसे दिग्गजों के जीवन और योगदान को संवेदनशील व रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, यह उन अनेक कम-ज्ञात नामों और उनके महत्त्वपूर्ण योगदानों पर भी प्रकाश डालती है, जो इस सांस्कृतिक परिदृश्य को पूर्णता देते हैं। सिनेमा, इतिहास और साहित्य में समान रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक एक अनमोल ख़ज़ाना है।